राहु का रत्न गोमेद (नग) धारण करने के लाभ-हानि, नियम धारण विधि,कीमत धारण करने से पहले रखें ये सावधानियाँ नहीं तो होगा नुकसान gomed ston benifit in hindi

दोस्तों आज हमबात कर रहे हैं राहु ग्रह का नग (रत्न) गोमेद राहु के कुप्रभाव को दूर करने के लिए धारण किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों की शुभता पाने और उससे जुड़े दोषों को दूर करने के लिए रत्नों के उपाय बताए गये हैं। गोमेद रत्न कितने रूपयें का है? गोमेद रत्न पहनने की विधि क्या है? गोमेद रत्न के नुकसान क्या है? गोमेद रत्न और बीमारी। गोमेद रत्न धारण करने के फायदे क्या है? गोमेद रत्न पहनने का मुहूर्त,समय और कब पहनें? गोमेद को राहु का रत्न माना जाता है।इसीलिए अगर आपकी कुंडली में राहु नीच का या अशुभ स्थान पर होकर प्रतिकूल फल दे रहा हो तो आपको किसी ज्योतिष परामर्श से गोमेद पहनना चाहिए। क्योंकि गोमेद रत्न को सामान्य दशाओं में धारण नहीं करना चाहिए। अगर आपका व्यवसाय, स्वभाव, गृह अशान्ति,रोग व्याधि से ग्रसित हो तो गोमेद पहनना आपके लिए लाभकारी होगा। लेकिन दशाओं की अनुकूलता के कारण जीवन में उतार चढ़ाव पैदा करता है।

राहु का रत्न गोमेद (नग) धारण करने के लाभ-हानि, नियम धारण विधि,कीमत धारण करने से पहले रखें ये सावधानियाँ नहीं तो होगा नुकसान gomed ston benifit in hindi 

गोमेद रत्न जिन व्यक्तियों की कुण्डली में राहु लग्न त्रिकोण भाव में हो उन्हें यह रत्न राहु के प्रभाव को कम करने के लि पहनना चाहिए।  गोमेद रत्न के अनेकों प्रकार और रंग है जैसे - काला गोमेद, सफेद गोमेद, पीला गोमेद, लेकिन सबसे विशेष व लोगों की पसंद उल्लू की आंख के रंग का गोमेद रत्न शुभ व पसंद किया जाता है। राहु एक ऐसा छुद्र ग्रह माना जाता है इसका कोई भरोसा अस्तित्व नही है, यह जिस राशि नक्षत्र, भाव,दशा से जुडता है उसी के अनुसार फल देता है।लेकिन पहनने से पहले ज्योतिष की सलाह लेनी आवश्यक है अन्यथा आपको भारी नुकसान भी उठाना पढ सकता है।
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गोमेद रत्न के चमत्कारी फायदे

यदि आप राहु ग्रह का गोमेद पहनना चाहते है तो पहले यह देख लें कि राहु आपके किस चरण का है। फिस किसी अनुभवी जोतिष से सलाह लेकर ही गोमेद धारण करें नहीं तो नुकसान भी उठाना पढ सकता है। लेकिन बात करे फायदे की तो आप सोच भी नहीं सकते जितना लाभ आपको गोमेद देने वाला है।

● गोमेद जातक के लिए बहुत लाभदायक व भाग्यशाली होता है क्योंकि  राहु के गोमेद रत्न के शुभ प्रभाव से शारीरिक और मानसिक और भावनात्मक से सुख मिलता है।

● गोमेद रत्न विशेष कर कालसर्प दोष से पीडितों के लिए शुभ माना जाता है। और कालसर्प के दुष्प्रभाव को कम।करता है।

● गोमेद धारण करने से मन की शक्ति बढ जाती है। तनाव कम होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

● गोमेद रत्न राजनेता, कानून तथा वकील को खास लाभ प्राप्त करता है।

● गोमेद पहनने से भय,भूत-प्रेत, छल-छिद्र, जादु-टोना सव दूर हो जाता है।

● किसी को धन सम्बन्धित दिक्कत हो या धन कभी टिकता न हो तो गोमेद धारण करें ।

● जिस व्यक्ति के मन में बेचैनी हो या घर में मन न लगे, चिडचिडापन सताने लगे तो उसे गोमेद पहनना चाहिए। 

● पति-पत्नी के बीच तलाक जैसे समस्याओं का आना आपसी प्रेम न बनना, शारीरिक सम्बन्ध न बना पाना जैसी समस्याओं के लिए गोमेद पहनना चाहिए ।

● राहु केन्द्र में विराजमान होकर या एकादश भाव में होने पर आपको गोमेद शुभफल देगा।

● अगर कुण्डली में राहु आपके शुक्र और बुध के साथ हो तो विशेष योग बनते है वह कयी गुना लाभ देता है।

राहु का गोमेद रत्न किसे धारण करना चाहिए किसे नहीं

इन्हें पहनना चाहिए -- जिन व्यक्तियों की या लग्न कन्या राशि, वृष राशि,मिथुन राशि, कुम्भ राशि या तुला राशि हो तो उन्हें गोमेद धारणा करना चाहिए। अगर आपकी कुण्डली में राहु एक,चार,सात,दश, पांचवें या नवम मे से किसी भी भाव में होने से शुभ फल देता है। इसके अलावा अगर आप राजनीति में आगे बढना चाहते है या अपनी प्रसिद्धि हासिल करना चाहते है तो आपको बहुत लाभ प्राप्त होगा।आप विना सोचे समझे व रुकावटें के हफलता की सीढि को पार करते जाओगे।

गोमेद रत्न किसे नहीं पहनना चाहिए -- गोमेद के साथ कभी मंगल चंद्र और सूर्य ग्रह के रत्न नही पहनना चाहिए अन्यथा जातक की ग्रहचाल बिगड जाती है। और सामन्य दशाओं मे गोमेद धारण नहीं करना चाहिए।  अगर आपका व्यवसाय या स्वभाव इसके अनुकूल हो तो ही इसको पहने नहीं नुकसान के साथ जीवन में उतार चढ़ाव की स्थिति पैदा कर सकता है।

गोमेद और बीमारी का सम्बन्ध 

गोमेद धारण करने से विशेष कर इन बीमारियों में फायदा व लाभ मिलता है। जैसे पेट खराब रहना, पेट सम्बन्धित अनेकों विकारों को दूर करना, शारीरिक शक्ति सुदृढ़ करना, मानसिक तनाव व डिप्रेशन को दूर करना, मिर्गी दूर करना, आंखों सम्बन्धित विकारों में  राहत देना, ब्लड प्रेसर व अन्य कयी सारी बीमारियों के प्रभाव को कम करने में गोमेद अहम भूमिका निभाता है। 

गोमेद धारण करने की विधि विधान क्या है 

गोमेद को धारण करने के लिए शुद्धता का विशेष ध्यान रखना चाहिए इसे आप शनिवार के दिन आर्दा, शतभिषा, और स्वाति नक्षत्र मे धारण कर सकते है।इस रत्न को अष्ट धातु या चांदी की अंगूठी में पहनना चाहिए।  घर में ही षोडषचार पूजा करके फिर 108 बार ॐ ह्रां,ह्रीं,ह्रां सः राहवे नमः  मंत्र का जाप के बाद मध्यमा अंगुली में धारण करना चाहिए।  

गोमेद की पहचान एवं उपरत्न और कितने रति का पहने

गोमेद कम से कम  6 रति का ही शुभ फल देता है। और उपरत्न की बात करे तो यह रत्न उतना कीमती नहीं है और ना ही इसके साथ धोखाधड़ी का खतरा रहता है। फिर भी आप इस रत्न को नही खरीद पा रहे है तो आप इसके उपरत्न तुरसा और साफी को धारण कर सकते है।और गोमेद की पहचान के लिए यह देखना आवश्यक है कि उसमे किसी प्रकार का गड्डा न हो या किसी प्रकार का धब्बा न लगा हो, गोमेद में लाल रंग के छीटे न हो। गोमेद मे चीरा या क्रास का निशान न हो।

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